Saturday, July 25, 2009

मैं और मेरा मैट्रो


मैं और मेरा मैट्रो...

मैट्रो दिल्ली शहर का आन बान और शान । लेकिन बात शुरू करे से पहिले आपकों बताई दूं कि कृपया मेरे भाषा से जादे मेरे भाव को समझे । हॉ तो बातचीत की शुरू आत करतें हैं मेरे मेट्रों । मेरे मैट्रो की शुरूआत आज से तकरीबन दस साल पहलें हुआ था । अभी तक मेरे मैट्रो ने लगातार कामयाबी का झंडा गाड़ा हैं । मुदा ये कामयाबी अब लगता हैं कि धीरे - धीरे धूमिल होती जा रहीं हैं । देखियें और आइयें समझनें की कोशिश करतें हैं इस पूरे वाकया पर ।
लगभग आज से एक साल पहलें । जहॉ तक मुझे याद हैं एक साल के पहलें की ये बात हैं । दिल्ली के दिल में सें एक लक्ष्मीनगर में मेरे मैट्रो की पहली बार प्रतिष्ठा धूमिल हुई थी । अगर मेरे एक फाजिल दोस्त की बात करें तो इस दिन मेरे मैट्रो पहली बार मिट्टी का तेल हुआ था । इस मुहावरा का मतलब तो आज तक मैं समझ नहीं पाया । मुदा इतना जरूर पता चल गया हैं मिट्टी का तेल सब तेल में निकृष्ट होता हैं । भलें ही एक चिंगारी से ये पूरा सूपड़ा साफ कर दें ।
दूसरी घटना इस साल बारह जुलाई की हैं । जिसका लाइव कवरेज मैने किया था । अब ये मत कहिएगा कि मैं अपनें मुहं मियां मिठ्ठू बन रहा हू । ज्ञात हो कि बारह जुलाई को जमरूदपुर में मैट्रो पुल ठह गया था । जिसमे काफी लोग मारे गये थे । ये वाकई मैट्रो के इतिहास में बहुत बड़ी घटना थी । लापरवाह और जिम्मेदार साथ में दोषी भी । कौन हैं ये जगजाहिर हैं । और इस पर मैं सार्वजिनक तौर पर बोलना नहीं चाहता हूं ।
तीसरी घटना ठीक उसके अगलें उसी जगह हैं । जहॉ क्रेन टूट गया था । इसमें कोई हताहत नहीं हुआ ।
चौथी घटना अभी हाल की हैं । पंजाबीबाग इलाके की । जहॉ एक मजदूर की जान चली गयी ।
ये सभी घटनाओ नें मेरे मैट्रो की इज्जत धूमिल करनें में कोई कसर नहीं छोड़ी । दोषी जो भी हैं उस पर कार्यवाई होनी चाहिए । लेकिन क्या ये होगा । ये सोचनें का विषय हैं । लेकिन मेरे हिसाब से कृपया इस पर सोच विचार ना करें । क्योकिं हमारे देश में क्या होता हैं ये तो आप सभी को अच्छी तरह से पता हैं । मेरे बोलनें का कोई भी औचित्य नहीं हैं ।
भड़ास बहुत हैं । पर आखिर कितना हद निकाला जाए । जमानें में और भी बहुत काम हैं ।
आपका दिलीप ...