Monday, August 31, 2009

मैं हाकी हूं ....

मैं हाकी हूं ....
अभी कुछ दिन पहले राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया गया । लेकिन क्या हम लोग जानते हैं कि हमारा राष्ट्रीय खेल हॉकी हैं । जाहिर हैं हम में से बहुत लोग जानते होगें । और हम में से बहुत लोग नहीं जानते होगें । आईये सुनते हैं हॉकी कहानी हॉकी की जुबानी .......
मैं हाकी हूं । मुझे भारत के राष्ट्रीय खेल के नाम से पहचाना जाना जाता हैं । बाकी मैं आज अपना पहचान खो चुका हूं । मैं तो बस अब कंपटीशन में पूछे जाने वाले सवाल तक सिमट के रह गया हूं । मेरी ये हालत देखके मेरे बेटे सब की आत्मा कराह रही होगी । लेकिन आज मैं एकदम बेबस हो गया हूं । एक समय था जब ओलंपिक में मेरे बेटे ध्यान चंद और उनके भाई रूपसिंह के खेल से दुनिया भर में मेरी तूती बोलती थी । और मेरे बेटे ध्यान चंद को हॉकी का जादूगर कहा जाता था । वहीं जब मैं इतिहास का पिछिला पन्ना पलटता हूं तो देखिये ओलंपिक में छे गोल्ड मेडल जीते थे । खाली 1980 तक कुल 8 गोल्ड जीत के मेरा नाम रौशन किया था । उसके बाद मेरा स्वास्थ बिगड़ता चला गया । और अब मुझे ना तो कोई पहचानता हैं ना ही कोई जानता हैं । दुर्दशा यहां तक पहुंच गयी हैं कि देश 2008 के पेइचिंग ओलिंपिक में क्वालिफाई भी नही कर सका । दुनियाभर में हॉकी का स्वरूप बदल गया मगर मेरा हालत जस का तस बना हुआ हैं । इंटरनेशनल हॉकी फेडरेशन में मेरे अधिकारी सब एकदम्मे निकम्मे साबित हुआ । फील्ड में बदलाव भी मेरे हालत बिगाड़नें में कोई कसर नहीं छोड़ा । बाकी कसर हॉकी के फ्लॉप मार्केटिंग ने पूरा किया । जिससे अभी भी राष्ट्रीय खेल होने के बावजूद मेरे को स्पॉन्सर का हमेशा टोटा रहता हैं । वहीं पर मेरे दोस्त क्रिकेट मुझसे काफी आगे निकला गया । बाकी आज भी मैं अपने हालत सुधरने की बाट जोह रहा हूं । कब सुधरेगी मेरी हालत । फिर कब बहुरेगा मेरा दिन । फिर कब लौटेगा मेरा पुराना पहचान । कब फिर मैं निकलूगां किताब के पन्ना से बाहर । और दुबारा फिर से कब बजेगा मेरे नाम का डंका ।

हरजाई बिजली...

हरजाई बिजली...
मिसेज शर्मा अपना फेवरेट सीरियल नहीं देख पा रही हैं ... तो बिट्टू बाबा को वीडियो गेम खेलनें में दिक्कत हो रहा हैं ... गांव के कलावती के घर में भी अंधेरा हैं ... तो पप्पू भैया समाचार नहीं सुन पा रहें हैं ...बब्लू को अपना होमवर्क करना हैं ... नहीं तो कल स्कूल में मैडम पिटाई करेगीं ... जिससे बब्लू बाबू मोमबत्ती में ही पढ़के अपने आखं पर जोर लगा रहे हैं ... गांव के कलावती से बड़े शहर में रहनें वाली मिसेज शर्मा तक ... पप्पू भइया से लेके बब्लू तक ... सब के दुख का कारण एक ही हैं ... बिजली ... ये बिजली इतना हरजाई हो गयी हैं कि सबका मिजाज पस्त कर दिया हैं ... किसे के घर को अंधेरा कर दिया हैं ... तो किसी को सास बहू की खबर नहीं मिल पा रही हैं ... हरजाई बिजली इतना रूला रही हैं कि लोग अपने घर को छोड़ के रोड रानी के शरण में आ गए हैं ... जी हॉ हम अभी फिल्मी बिजली का बात नहीं कर रहे हैं ... हम बात कर रहे हैं देश भर में बढ़ रहे बिजली संकट के ... गौरतलब है कि पूरे देश में हरजाई बिजली अपना कहर बरपा रहीं हैं ... जिससे आम आदमी का जिन्दगी बेहाल हो गया हैं ... देश के राजधानी में दिलवाले लोगों का भी हालत पातर हो गया हैं ... तो मुंबई के पैसा वाले लोग का भी हालत किसे से बढ़िया नहीं हैं ... एक तरफ गर्मी पसीना निकालने में कोई कसर नहीं छोड़ रहीं हैं ... तो बिजली इसको रोकने में हाथ खड़ा कर लिया हैं ... हरजाई बिजली ने सबको बेबस बना दिया हैं ... बिजली कटौती से जहां उद्योग जगत के छुक छुक गाड़ी रूक गयी हैं ... वहीं पैसा वाला लोगो का भी हालत कोई बढ़िया नहीं हैं ... हर जगह खाली एक हीं हल्ला हैं ... हरजाई बिजली कब वफा करेगी ...