Wednesday, March 16, 2011

क्या किसी को दोगला कहना बुरा हैं

अभी जल्दी मैंने एक लेख लिखा हैं । इस लेख में मैनें एक सज्जन को दोगला कहके सम्बोधित किया था । मेरा ये लेख इन्हीं के आगे पीछे घूमता फिरता हैं । बहरहाल ये लेख मैनें अपने बहुत अजीज मित्र को पढ़ने कि लिए भेजा । बात दोगलापन पर आकर रूक गया । वे मुझे मीडिया इथिक्स पर लाके पटक दिए । भाई बात तो बिल्कुल सही हैं । अपशब्दों का प्रयोग करना कतई उचित नहीं हैं । मैनें उनसे पूरी तरह सहमत हूं । लेकिन क्या कोई मुझे समझाएगा कि अगर दोगलई करना अनुचित नहीं हैं । तो इसे बोलना और उस इंसान को सम्बोधन करना क्यों बुरा हैं । उस समय कहा घुस जाता हैं इथीक्स और नैतिकता । जब एक बेरोजगार संघर्ष कर रहे युवक को ये दलाल टाइप के लोग नौकरी देने के नाम पर चमचई करवाना पसंद करते हैं । और लड़कियों को लालच और भूखे नजरों से देखते हैं । उस लड़की का इज्जत तार तार करने के लिए हमेशा प्रयासशील रहते हैं । और अंत में ये लड़की या तो नौकरी से आस छोड़ देती हैं । या फिर समझौता कर लेती हैं ।
आखिर कब तक चुप रहेंगें और खामोश रहेगें हम । आखिर कब तक ऐसे ही दलालों के हाथों लुटती रहेगी अस्मत ।
हां कोई जवाब इसका किसी के पास । नहीं होगा । क्योंकि साफ हैं हम विरोध नहीं करते हैं । और कहते जो हो रहा हैं होने दो । लेकिन आखिर कब तक ऐसा ही चलता रहेगा । आखिर कब तक सिस्टम के हाथो परेशान होकर सुसाइड करेगें युवा ।
एक बड़ा सवाल हैं । सिस्टम को बदलना होगा ।
और दोगलों को उनकी औकात बतानी होगी । तभी जाके सुराज की स्थापना सहीं मायने में सिद्ध होगा ।
ज्वाला जलती रहेगी ...

Thursday, March 3, 2011

समय का पहिया

कहते हैं समय बीतने का पता नहीं चलता हैं । पुराना साल बीता । नहीं पता पता चला । इस साल के दो महीनें बीत गये । पता नहीं चला । लगता हैं कि कल की बात तो थी । जब हम नये साल का स्वागत कर रहे थे । पर क्या समय ना तो किसी के कहने से रूकता हैं । और नहीं किसी के कहने से चलता है । वहीं दूसरी ओर मौत और जिंदगी जब तलक रहनी होती हैं । तब तलक रहती है । इसलिए कहते है कि समय सबसे ज्यादा बलवान होता हैं ।