Monday, February 21, 2011

सूरत -१


अभी कुछ दिन पहले सूरत आया हूं जैसा सुना था वैसा ही पाया हूं मोदी का समर्थक हूं पर अब ये और बढ़ गई क्या हिदूं या फिर मुस्लमान सभी लोग मोदी के प्रशंसक हैं और हो भी क्यो ना मोटा भाई नें काम ही ऐसा किया हैं लोगों का मानना हैं यहां तक की मैं भी मान रहा हूं यहां पर एक सप्ताह बिताने के बाद भाई रात के ११ बजे भी सूरत में क्या पुरूष क्या महिलाएं सभी लोग बेफ्रिक होके घूमते नजर आते हैं जो ना दिल्ली में देखा ना हीं लखनऊ में लेकिन यहां पर देखा एक आम आदमी के नजरिए से देखे तो ये भी बहुत बड़ी बात हैं रोटी , कपड़ा और मकान के बाद अगर किसी चीज की जरूरत होती हैं तो वो हैं सुरक्षा की। जॉन मास्लो ने भी यही कहा हैं । अपनी हिरारकी थ्योरी में ।
आगे की कहानी ... जारी रहेगी

वापसी

बहुत दिनों बाद आज लिखने का मौका मिला हैं । एक तो सिस्टम की कमी दूसरा हिन्दी फोंट की दिक्कत । पर अब लगता हैं कि लिखने का सिलसिला हमेशा जारी रहेगा ।