Wednesday, February 23, 2011

सूरत ---- २

सूरत आए हुए लगभग एक सप्ताह हो चुका है । इन दिनों में सूरत को थोड़ा बहुत देखा । बाकी काफी व्यस्त रहा इन दिनों । वहीं बहुत दिनों बाद ऑफिस जाने लगा दोबारा । काफी दिनों से खाली बैठा था । शायद ये अच्छा ही था । क्योकिं नौकरी ढूढंने का मुझे कोई अनुभव नहीं था । वो अब हुआ । चलो जो हुआ अच्छा ही हुआ । देर आए दुरूस्त आए । दोबारा वहीं ऑफिस ऑफिस । और वहीं मीटिंग मीटिंग का खेल । पुराने दिनों में एक बार फिर वापसी हुई । पुराने साल की बात करे तो वह खाली मेरे लिए ही नहीं अपितु पूरे देश के लिए खलबली वाला था । पूरा साल झंझावतों से झूलता रहा । लेकिन क्या ये साली जिन्दगी हैं । कोई क्या कर सकता हैं इसमें भला । सब ऊपर वाले की मर्जी है भाई
आगे की कहानी ... जारी रहेगी