Monday, June 6, 2011

फिर याद आया जलियांवाला बाग




दिल्ली में रामलीला मैदान में जो कुछ हुआ उससे एक बार फिर इतिहास के पन्ने अपने आप पलट गए । पांच जून की मध्य रात्रि भारतीय इतिहास में काली स्याह से लिखी जाएगी । जब स्कूल में था तब जलियांवाला बाग की सच्चाई पढ़ाई गई थी । इस घटना को जानने के बाद बालमन में यही विचार आया था कि क्या कोई ऐसा भी कर सकता है । अगर आप इतिहास पढेगें तो देखेगें हर जगह अंग्रेजो के जुल्म कि दास्तां बयां की गई है । और कैसे उनसे हमारे क्रांतिकारी लोहा लेते दिखे है । दिल्ली की रामलीला मैदान ने वो पन्ना एक बार फिर खोल दिया ।
रविवार का दिन सो कर थोड़ा लेट उठा । उठकर सीधे टीवी खोला सोचा देखू देश दुनिया का क्या हाल है। न्यूज चैनल पर लॉग करते ही । दूसरे जलियांवाला बाग की जानकारी मिली । देखा कि आजाद देश के सरकार ने कैसे एक बार फिर सच को कुचला है । एक बार फिर व्यवस्था परिवर्त्तन के खिलाफ दमन किया गया है । पहले हमने अंग्रेजों के खिलाफ जंग लड़ी । अब अपने ही लोगों के खिलाफ लड़ रहे है । जिनको रक्षक बनाया क्या पता था वही भक्षक बन जाएगें । जो जनता के सेवक है । वो अपने मालिक को ही कांट खा बैठेगें । क्या पता था आस्तीन का सांप पाल रहे है ।
आखिर कार आधी रात को ऐसी क्या जरूरत आन पड़ी जो ऐसा किया । इसमें दिल्ली के कमिश्नर ने भी स्वीकार किया मेरे आदेश से नही बल्कि उपर से आदेश आया है और प्रेशर है । लेकिन बाद में अपने बयान से मुकर भी गए । अगर यही सब करना था तो सुबह इंतजार क्यों नही किया । कहीं बाबा को वही भीड़ में मारने की साजिश तो नही थी । लेकिन बाबा के भक्तों ने सूझबूझ से काम लिया । इतना भीड़ होने के बावजूद भी खून की नदियां बहते बहते बच गई ।
आखिर बाबा ने क्या गलती की - क्या काले धन के बारे में पूछना गलती है । क्या भ्रष्टाचार को रोकने के लिए कहना गुनाह है । इस निकम्मी सरकार को जानना चाहिए कि ये उसका निकम्मापन और नकारापन ही है जिसने बाबा रामदेव को ऐसा करने के लिए मजूबर किया । खैर इसी बहाने पीएम साहब की भी पोल खुली और गांधी परिवार की भी । ईमानदारी का चोला बहुत पहन लिया । अब ईमानदारी शब्द को ज्यादा बदनाम नही करना चाहिए । अगर इतने ही ईमानदार हैं तो क्यू कर रहे है ये सब । चलिए मान लेते है एक रिमोट कंट्रोल है । तो संचालित हो रहे है । इस रिमोट कंट्रोल से । क्यूं नही इस्तीफा दे देते अपने पद से ।
सरकार भूल गई ही ये वही जनता है । जिसने इंदिरा गांधी जैसे कद्दावर नेता की जमानत जब्त करवा दी थी।
सत्ता के नशे में चूर लोगों को अभी इसका अहसास नही हो रहा है । लेकिन चुनाव हारने के बाद खुद ब खुद समझ जाएगे । सरकार एक के बाद एक घोटाले करती रहे । और जनता कुछ बोले भी ना । वाह भाई वाह ये कहां कि नियम है । क्या इस देश में अब बोलने का भी अधिकार नही है । लोगो को । वैसे बाबा ने एक सराहनीय काम किया है । और ये एक अच्छा मौका है एकजुट होने का और व्यवस्था परिवर्त्तन करने का ।
कहां है अब कांग्रेस के तथाकथित युवराज । अब तो उनके सरकार ने ये सब किया है । बात बात में नाटक करना तो कोई उनसे सीखे । बिना मुद्दा के नाटक करते रहते है । अब आएं सामने । आखिर कहां है वो क्यो नही अपनी सरकार के खिलाफ बिगुल बजा रहे है । क्यो नही करप्सन और काला धन पर अनशन कर रहे है । क्यों नही इस पर उनके चाटुकार लोग उनके लिए पटकथा लिख रहे है । सीधी सी बात है । ये सब उन्ही के इशारे पर हुआ है । जनता को बहुत बेवकूफ बना चुके और हम बहुत बेवकूफ बन चुके । लोगों में जागृति हो रही है । लोग जाग रहे है । और जिस दिन हर नागरिक जाग गया । उस दिन फिर जगह ढूढंने से भी नही मिलेगा । जरा एक हताश और निराश नेता पर गौर फरमाइए जो ओसामा को ओसामा जी कह कर बुलाते है । कभी इनके भी ठाठ थे । मुख्यमंत्री रहे है दस साल । लेकिन जनता ने ऐसा पटका कि आज उस प्रदेश को छोड़ दिया है । ऐसे तो मुख्यमंत्री है साहब । अभी मुस्लमानों की राजनीति कर रहे है। आपको याद तो होगा ही भट्टा परसौल । कितना नाटक किया था वहां पर । इनके बारे में कुछ भी बोलना अपना मुंह खराब करना है । इसी लिए इनके लिए बस इतना ही ।
आपको बता दूं कि स्विस बैकं ये हताश और निराश मुख्यमंत्री का अच्छा खासा पैसा जमा है । गांधी परिवार के स्विस एकांउट के बारे में बताने की जरूरत तो है नही । एक बार राजीव जी का नाम टॉप पैसा जमा करने वालों में आया था ।
बाबा ने एक बार फिर लोगों के मन में अलख जगा दी है । एक बार फिर लोग सरकार के खिलाफ एक जुट हो रहे है। अबकी बार भी एक विदेशी है । और कुछ भेड़ियें चाटुकार ।