Monday, January 16, 2012

आज दो साल हो गए...

आज १४ जनवरी हैं और आज का खास दिन आज के दिन ही मैनें चैनल को अलविदा कहा था । दो साल बीत गए इस घटना को जिस दिन मै उठकर बिना सोचे समझे चैनल के दफतर पहुचां और सीधे बॉस के केबिन में जाकर इस्तीफा दिया था । सब साथी ने रोकने का भरसक प्रयास किया था । पर एक मैं था जिसनें पीछे मुड़कर दोबारा उस ठौर को देखना उचित नही समझा । चैनल छोड़ने के बाद लिखने की रफ्तार पर भी ब्रेक लग गया । आज अपने गुरूजी के पास आया हूं । उन्होनें आज बहुत आग्रह किया कि मैं फिर से लिखना शुरू करू । इसलिए उन्ही के कंम्पयूटर पर खट खट कर रहा हूं । उन्होनें बहुत कहा कि तुम फिर से लिखना आरंभ करो । स्वतंत्र लिखो निर्भीक होकर लिखो । सच बताऊ तो लिखने का मन शुरू से करता था । पर इधर चैनल छोड़ने के बाद इच्छा ही समाप्त हो गई । आज बहुत जिदद करने पर अपने को दोबारा मना पाया हूं । पर आशा हैं कि पहले कि वह बेचैनी और बेड़ियां नहीं होगी । आज किसी संस्थान में नही हू । आज स्वछंद होकर लिख सकता हूं । और लिख रहा हू ।
दरअसल हुआ यूं कि गुरूजी आज गूगल में कुछ ढ़ूढं रहे थे । पता नहीं कैसे वे मेरे ब्लाग पर चले गए और फिर नतीजा इस लेख के रूप में हैं । एक समय का पहिया हैं जो अपने गति से घूमता जा रहा है । और दुसरे हमारे जैसे लोग जो उसको समझ नही पा रहे हैं । लिखना बहुत अच्छी चीज हैं । ऐसा कहा जाता हैं । और मैनें महसूस भी किया हैं । पर जीवन की आपाधापी और रोजी रोटी के चक्कर में समय ठहर ही नही पा रहा था।
ना तो वह अब वक्त रहा और ना ही वो जोश और खरोश । जीवन के इन दो सालों में जितना सीखा शाय़द कभी नही सीख पाया था और ना ही सीख पाउंगा । कैसे दोस्त दुश्मन बने और कैसे दुश्मन दोस्त ये मैने अब हैं जाना । अगर सच कहूं तो अपने अंदर काफी बदलाव महसूस कर रहा हूं । पहले जिन बातों को नापसंद करता था । उन्हे अब एकदम नापसंद नही करता हूं । यही बदलाव में अपने आस पास भी देख रहा हूं । जो कभी आंख उठाकर नही देखते अब वे घूरते नजर आ रहे हैं । बहरहाल बहुत दिनों बाद आज खट खट की यहीं आवाज अच्छी लग रहीं है । आज उसी अंदाज में फिर से टाइप कर रहा हूं । हां सोच और विचार जरूर बदले हुए हैं ।
उम्मीद करता हूं जल्दी कुछ लिखूगां...
आपका दिलीप...