Monday, July 28, 2014

One instance from my exp.

Infact I must share one instance on this platform...One of my friend use to hear our regional songs in Maithili. His wife was totally against that...Once I visited his house the same matter was discussed over there.And his wife told that he son is being spoiled with that songs...I had no answer at that time except keeping quiet...I just discussed this as I am cent per cent right in saying this mindset is just the first step of degradation...

Sunday, July 27, 2014

"अंकल मेरी मां के कातिलों को फांसी दिला दो"

"अंकल मेरी मां के कातिलों को फांसी दिला दो"
...जी हैं कुछ ऐसे ही शब्द थे उस मृतक महिला के बेटी के जिसकी मौत पिछले दिनों मोहनलालगंज में हुई थी...आज एक पत्रकार मित्र से मिला...संयोगवश चर्चा मोहनलालगंज वाली घटना पर शुरू हुई...तब उन्होनें बताया कि ऊपर वाले शब्द उस महिला की बेटी नें उनसे कहा था जब वो जीपोओ गए थे...गौरतलब हैं कि उस महिला के  बच्चे और परिवारजन जीपोओ पर सरकार से सीबीआई जांच की मांग को लेकर धरना दे रहे हैं...
17 जुलाई जी हां शायद ये वहीं तारीख हैं जिसकी कल्पना उस मृतका के घरवालों ने कभी नही कि होगी...इधर जहां जहां जा रहा हूं...वहां मोहनलालगंज की घटनी की चर्चा जरूर हुई हैं...अत्यंत लोमहर्षक घटना है...शाटद दिल्ली के निर्भया कांड से भी जादे...और उस पर नमक हमारे हुक्मरानों नें और नौकरशाहों छिड़का है...अगर नौकरशाहों के बयान पर गौर करें तो सिर के सारे बाल उखाड़ते रहेगें आप...हमारे लखनऊ शहर के कप्तान साहब ने तो गजब ढाह दिया हैं...पहले कहा कि गैगरेप हुआ है फिर कहे कि एक्के आदमी का हाथ है...कोई रेप वेप नय हुआ हैं...खैर आज इनके इस बयान को फोरसेंनिक विभाग ने नकार दिया हैं...कप्तान साहब का इतिहास काफी सुनहरा रहा है किसी भी केस को ऐसी तैसी करने में...कल अखबार में कही पढ़ रहा था कि एक बार एक जिले में दंगा हुआ था...और वे वहां पर कप्तान थे और जनाब भाग गए थे...खैर इस घटना के दस दिन हो गए है...तमाम मीडिया रिपोर्ट और बयानों को देखा जाए तो पुलिस चाहती ही नहीं है कि असली सच्चाई जनता के सामने आए...कारण निश्चित कोई रसूखदार हैवान का होना हैं....
इधर अगर आप अखबार का अवलोकन करेगें तो देखेगें कि लखनऊ में लगातार क्राइम का ग्राफ बढ़ता जा रहा हैं...खासकर नए कप्तान साहब के आने के पश्चात ज्यादा...एक आदमी आज इतना असुरक्षित महसूस कर रहा है जिसका बखान नहीं किया जा सकता हैं...
कप्तान साहब से बस एक गुजारिश है कि कृपया लखनऊ को वैसे ही रहने दें...जिससे हम गर्व से कह सके कि “जरा मुस्कुराइये कि आप लखनऊ में हैं”.

Saturday, July 19, 2014

हद हैं बेशर्मी की भाई...

अभी थोड़ी देर पहले घर लौट रहा था...रास्ते में सीएम आवास पड़ता हैं...वहां बहुत जादे भीड़ थी...भीड़ देखकर और सुरक्षा के तामझाम देख कर लगा कि कोई चल बसा है...लेकिन कमबख्त ऐसे लोग मरते थोड़े हैं...वहां लगे स्क्रीन देखकर और पता लगाने पर मालूम चला कि रोजा का आयोजन किया गया है...अब प्रदेश  के निवासी होकर इतना तो हक बनता हैं कि क्या सरकार के मुखिया से पूछ सके कि जिस प्रदेश में इतना हो हल्ला हो रहा है वहां के मुखिया को क्या ये शोभा देता हैं...लेकिन मुखिया के आखं में पानी कहा...याद रखना जनता अबकी बार माफ नहीं करेगी...अब हद हो चुका है...
अब तो ऐसा प्रतीत होता हैं कि मुखिया के गर में कोई महिला नहीं हैं और उन्हें किसी पुरूष के पेट से पैदा हो...और तो और नेता जी भी नहीं चूक रहे...कह रहे हैं बच्चों से गलती हो जाती हैं...भेजदे अपनी बहू या बेटी को मालूम चल जाएगा कि गलतीि क्या होती हैं...चुल्लू भर पानी में उन्हें डूब मरना चाहिए...